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योगदान के 17 साल बाद फर्जी शिक्षक चढ़ा निगरानी के हत्थे

मधेपुरा, बिहार
बिहार के मधेपुरा में योगदान के 17 साल बाद निगरानी विभाग के द्वारा एक फर्जी शिक्षक को दबोचा गया है। 
 दरअसल यह पूरा मामला बिहार के मधेपुरा जिले के कुमारखंड थाना क्षेत्र के बिशनपुर कोर्लाही पंचायत का है जहां छापेमारी कर एक फर्जी शिक्षक को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जानकारी देते हुए थाना अध्यक्ष उदय कुमार ने बताया की निगरानी विभाग पटना के द्वारा फर्जी शिक्षकों की जांच की जा रही है इसी दौरान कुमारखंड थाना में कांड संख्या 428/23 दर्ज कराया गया है जिसमें निगरानी विभाग के द्वारा बताया गया है कि फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए विकास कुमार सिंह नाम का व्यक्ति शिक्षक बन बैठा है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना मधेपुरा के द्वारा उपलब्ध कराए गए फोल्डर अवलोकन में पाया गया कि जिले के कुमारखंड थाना क्षेत्र अंतर्गत कुर्ला ही गांव निवासी दीप नारायण सिंह के पुत्र विकास कुमार सिंह फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नियोजित शिक्षक के रूप में वर्ष 2006 में ही अपना योगदान किया था जो वर्तमान में प्राथमिक विद्यालय कोरलाही में पदस्थापित हैं एवं पंचायत शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। उक्त शिक्षक के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय पटना के द्वारा निर्धारित एमनेस्टी पीरियड में त्यागपत्र समर्पित नहीं किया गया नियोजित शिक्षक विकास कुमार सिंह का इंटर अंक पत्र रोल कोड 6305 रोल नंबर 10067 वर्ष 1996 जिसमें 607 अंक प्राप्त कर वह प्रथम श्रेणी से विज्ञान विषय में उत्तीर्ण हुआ था लेकिन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के जांच प्रतिवेदन में नियोजित शिक्षक विकास कुमार सिंह का यह अंक पत्र फर्जी पाया गया है इसके बाद नियोजित शिक्षक विकास कुमार सिंह के खिलाफ अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी से आपराधिक षड्यंत्र के तहत अवैध रूप से नियोजन में लाभ प्राप्त करने के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। जिसके बाद छापेमारी कर उन्हें गिरफ्तार किया गया एवं अन्य अज्ञात व्यक्तियों की गिरफ्तारी के लिए कानूनी प्रक्रिया की जा रही है।

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